धनतेरस पर्व कि शुरुआत कैसे हुई?
भारत देश विविधताओं से भरा है, तभी तो यहाँ हरेक 10 KM की दुरी पर कुछ न कुछ नया देखने को मिलता है l भारत देश सांस्कृतिक रूप से बहुत धनी है, इस देश मे न जाने कितने पर्व त्यौहार मनाये जाते हैँ l उन्ही मे से एक महत्वपूर्ण एवं सर्वाधिक धूमधाम से मनाया जानेवाला पर्व है दिवाली का, और दिवाली से ठीक पहले धनतेरस मनाया जाता है, जो की छोटी दिवाली से एक दिन पहले पड़ता है l जिसे हम धन्वंतरि जयंती और यम पुजा के नाम से भी जानते हैँ l इस बार का धनतेरस 5 नवम्बर को यानि मंगल वार को है l
ऐसा मानते हैँ की कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदसी को भगवान धन्वन्तरि का जन्मदिन है इसलिए इसी दिन धनतेरस मनाया जाता है l कहीं कहीं तो धन के देवता कुबेर कि भी पुजा कि परंपरा है l जैसा कि हम सब जानते हैं कि हमारे संस्कृति में स्वास्थ्य का स्थान धन से ऊपर माना जाता है l एक कहावत भी है कि, "पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में माया" तभी तो दिवाली में धनतेरस का विशेष महत्त्व है l
कहते हैँ की समुद्र मंथन से 16 महारत्नों कि प्राप्ति हुई थी, उन्हीं मे से एक धन्वन्तरि भी थे l जब भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे तो उनके हाथ मे अमृत कलश था l चुकि धन्वन्तरि कलश (बर्तन) लेकर प्रकट हुए थे, तभी से इस अवसर पर बर्तन खरदने की परंपरा है l चांदी सोना या सोने-चांदी के सिक्के जिससे जो संभव हो इस अवसर पर खरीदता है l ऐसा माना जाता है की चांदी से बना बर्तन या सिक्के खरीदने से संतोष की प्राप्ति होती है एवं घर मे महालक्ष्मी का वास होता है l भारत मे कहीं कहीं ये इस शुभ अवसर पे धनिया का बीज खरीदने कि भी प्रथा है l फिर दिवाली के बाद लोग उसी बीज को अपने खेतों या बैग बगीचों में बोते हैं l
कहते हैँ कि "जब आये संतोष धन सब धन धूरि सामान l संतोष से बढ़ के कोई बड़ा धन नहीं और संतोषी व्यक्ति से बड़ा कोई धनवान नहीं l जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है सुखी है l धनतेरस के दिन कोई भी वस्तु खरीदने से उसमें तेरह गुणा की वृद्धि होती है l
हिन्दु धार्मिक मान्यता के अनुसार धन्वंतरि आयुर्वेद के महा ज्ञानी एवं जनक थे, वे एक आयुर्वेदिक चिकित्सक भी थे, उन्हें देवताओं कि पदवी मिली थी l इसीलिए भारत में डाक्टर एवं चिकित्सक लोग भी धनतेरस पुजा बड़े धूमधाम से करते हैं l
धनतेरस के दिन संध्याकाल दीप जलाकर भगवान धन्वंतरि एवं माँ लक्ष्मी कि विधि विधान से पुजा अर्चना करनी चाहिए तभी हमें धन वैभव एवं स्वास्थ्य कि प्राप्ति होती है l
आप सभी को धनतेरस कि हार्दिक शुभकामनायें l Happy Dhanteras.
ऐसा मानते हैँ की कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदसी को भगवान धन्वन्तरि का जन्मदिन है इसलिए इसी दिन धनतेरस मनाया जाता है l कहीं कहीं तो धन के देवता कुबेर कि भी पुजा कि परंपरा है l जैसा कि हम सब जानते हैं कि हमारे संस्कृति में स्वास्थ्य का स्थान धन से ऊपर माना जाता है l एक कहावत भी है कि, "पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में माया" तभी तो दिवाली में धनतेरस का विशेष महत्त्व है l
कहते हैँ की समुद्र मंथन से 16 महारत्नों कि प्राप्ति हुई थी, उन्हीं मे से एक धन्वन्तरि भी थे l जब भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे तो उनके हाथ मे अमृत कलश था l चुकि धन्वन्तरि कलश (बर्तन) लेकर प्रकट हुए थे, तभी से इस अवसर पर बर्तन खरदने की परंपरा है l चांदी सोना या सोने-चांदी के सिक्के जिससे जो संभव हो इस अवसर पर खरीदता है l ऐसा माना जाता है की चांदी से बना बर्तन या सिक्के खरीदने से संतोष की प्राप्ति होती है एवं घर मे महालक्ष्मी का वास होता है l भारत मे कहीं कहीं ये इस शुभ अवसर पे धनिया का बीज खरीदने कि भी प्रथा है l फिर दिवाली के बाद लोग उसी बीज को अपने खेतों या बैग बगीचों में बोते हैं l
कहते हैँ कि "जब आये संतोष धन सब धन धूरि सामान l संतोष से बढ़ के कोई बड़ा धन नहीं और संतोषी व्यक्ति से बड़ा कोई धनवान नहीं l जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है सुखी है l धनतेरस के दिन कोई भी वस्तु खरीदने से उसमें तेरह गुणा की वृद्धि होती है l
हिन्दु धार्मिक मान्यता के अनुसार धन्वंतरि आयुर्वेद के महा ज्ञानी एवं जनक थे, वे एक आयुर्वेदिक चिकित्सक भी थे, उन्हें देवताओं कि पदवी मिली थी l इसीलिए भारत में डाक्टर एवं चिकित्सक लोग भी धनतेरस पुजा बड़े धूमधाम से करते हैं l
धनतेरस के दिन संध्याकाल दीप जलाकर भगवान धन्वंतरि एवं माँ लक्ष्मी कि विधि विधान से पुजा अर्चना करनी चाहिए तभी हमें धन वैभव एवं स्वास्थ्य कि प्राप्ति होती है l
आप सभी को धनतेरस कि हार्दिक शुभकामनायें l Happy Dhanteras.
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