वर्तमान कांग्रेस कि सच्चाई

कांग्रेस के मालिक या कहे कि कर्ता धर्ता रौल विंची उर्फ राहुल गांधी ने अपने को दत्तात्रेय गोत्र का कौल ब्राह्मण बताया है, ये बड़ी ही विचित्र और हास्यास्पद बात है कि भला एक मुस्लिम दादा फ़िरोज़ जहांगीर जिसकी इलाहाबाद में कब्र है, ये उसके पोते हैं , और एक रोमन कैथलिक महिला की संतान भला हिन्दू ब्राह्मण कैसे हो गयी ?

सोचने वाली बात ये है कि राहुल गांधी जो राोल विंची के नाम से विदेश में रह रहे थे और और इसी रौल विंची नाम से एम-फील में दाखिला ले रखा था, तथा इसी रौल विंची के नाम से राहुल गांधी बार्कलेज़ बैंक में खाता होल्ड कर चुके हैं जिसका नम्बर 504664922071640796 था, वो रौल विंची नामक प्रैक्टिसिंग रोमन कैथलिक भला हिन्दू ब्राह्मण कौन से सिद्धांत से हो गया ?

अब राहुल गांधी उर्फ रौल विंची ने आलू से सोना बनाने वाली मशीन के जैसे ही कोई ऐसी मशीन बना ली हो की जिसमे पीछे से रोमन कैथलिक डालो तो आगे से हिन्दू दत्तात्रेय कौल ब्राह्मण निकलेगा तो अलग बात है,

वैसे चलिए अब इन रौल विंची उर्फ राहुल गांधी की पारिवारिक पृष्ठभूमि से अवगत कराते हैं तो सर्वप्रथम बता दें कि रौल विंची उर्फ राहुल गांधी के दादा थे फिरोज जहांगीर खान जो कि एक पारसी मां और मुस्लिम पिता नवाब खान की संतान थे,

फिरोज खान ने इंदिरा प्रियदर्शनी नेहरु से लंदन की एक मस्जिद में बकायदा इंदिरा का धर्म परिवर्तन करवाकर निकाह किया था और इंदिरा ने इस्लाम कुबुल कर अपना नया नाम रखा था मैमुना बेगम, जिसकी पुष्टि जवाहरलाल नेहरू के सेक्रेट्री और इंदिरा के लंबे समय तक प्रेमी रहे एम.ओ मथाई ने अपनी किताब "रेमेनिसेन्स ऑफ नेहरू एज" में की है

जवाहरलाल नेहरु और मोहनदास करमचंद गांधी ने इंदिरा के धर्म परिवर्तन को उसके राजनैतिक करियर के लिए खतरा माना और मोहनदास करमचंद गांधी ने नेहरु को सुझाव दिया एक एफिडेविट के द्वारा फिरोज खान का नाम बदलकर फिरोज गांधी करा दो, यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि यहां कोई वास्तविक धर्म परिवर्तन नहीं हुआ, केवल एक एफिडेविट के द्वारा नाम बदल दिया गया और यह अफवाह फैला दी गई कि फ़िरोज़ खान एक पारसी है, जबकी वास्तव में फिरोज़ की मां पारसी थी और उसका बाप एक मुस्लिम था, इसीलिए फ़िरोज़ भी मुस्लिम ही थे

अब इसके बाद नेहरू और गांधी ने भारत की जनता को भृमित करने हेतु एक हिन्दू रीति वाला एक छद्म शादी का आयोजन करा दिया,

अब आपको यह भी बता दें कि मरणोपरांत फ़िरोज़ जहांगीर खान को इलाहाबाद के मर्म्फोर्ड कब्रिस्तान में दफनाया गया था जहां आज भी फ़िरोज़ जहांगीर की कब्र है, अब विचार कीजिये कि यदि फ़िरोज़ हिन्दू थे तो उनका दाह संस्कार होता और यदि फ़िरोज़ पारसी थे तो उनकी कब्र तो हो ही नहीं सकती, क्योंकि पारसी रीति-रिवाज के अनुसार मरणोपरांत शव को ना दफनाया जाता है, ना ही उसका दाह संस्कार होता है, बल्कि शव को खुले आसमान के नीचे पक्षियों व् जीव जन्तुओं के भोजन हेतु छोड़ दिया जाता है,

यह प्रमाणित करता है कि राहुल के दादा मुस्लिम थे इसीलिए उनकी कब्र है और उन्हें इस्लामिक रीति रिवाज से ही दफनाया गया था, इसी सच को छिपाने हेतु इस नकली गांधी परिवार का कोई भी व्यक्ति कभी फिरोज जहांगीर की कब्र पर नही जाता,

अब जब दादा मुस्लिम थे तो फिर राहुल के पिता भी मुस्लिम ही हुए, किन्तु यहां भी कहानी में ट्विस्ट है, राजीव गांधी जब रोमन कैथलीक सोनिया गांधी उर्फ़ एंटोनियो एलबिनो एडविज माइनो के प्रेम में पड़े तो कहते हैं कि शादी से पहले एंटोनिया अल्बीना एडवीज माइनो उर्फ सोनिया गांधी के परिवार ने राजीव के आगे धर्म परिवर्तन करने की शर्त रखी राजीव ने उसे स्वीकार किया और धर्मपरिवर्तन किया और अपना नया नाम रखा रॉबर्टो, भारत के शीर्ष नेता का रोमन कैथलिक बनना पोप जॉन पॉल द्वितीय को इतना भाया था कि वे स्वयं 1986 में राजीव और सोनिया के घर आये थे,

अंतोनियो एल्बिनो एडवीज माइनो ने अपने बच्चों का नाम रखा था रौल विंची और बियांका विंची, ये दोनों ही नाम विदेशी है, और भारत की जनता इन नामों के बच्चों को कही भविष्य में अपना नेता मानने से ही इनकार न कर दे अतः रौल विंची को राहुल गांधी और बियांका विंची को प्रियंका गांधी कर दिया गया,

और आज भी ये रंगे सियारों का परिवार उसी आधार पर चलते हुए अपने की भारतीय दिखाने हेतु और हिन्दू आबादी को भृमित कर उनका वोट बटोरने हेतु अपने को दत्तात्रेय गोत्र का कौल ब्राह्मण बताकर जनता की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास कर रहे हैं।
🇮🇳Rohan Sharma🇮🇳

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